मुझे लोग क्यूँ पढ़ें इसका उत्तर मेरे पास नहीं है सिवाय इसके की मैं कबीर की तरह बहुत सारे लोगों को सुनता हूँ और कबीर की तरह दिल से कहता हूँ। मैं आईआईटी, आईआईएम और इनवेस्टमेंट बैंकिंग वाला नहीं हूँ और न ही मैं सफल एनतेरप्रेन्योर हूँ। मैं कोई राजनेता या बड़े पुरस्कारों से सम्मानित समाजसेवी भी नहीं हूँ। ऐसा भी नहीं है की मैंने जीवन में कुछ नहीं उखाड़ा है लेकिन उससे मेरी सच लिखने की हिम्मत, योग्यता और नीयत निर्धारित नहीं होती है।