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धूप में भीगी चाँदनी - Softcover

दीपमाला

 
9789376424177: धूप में भीगी चाँदनी

Synopsis

धूप में भीगी चाँदनी" संवेदनाओं, प्रेम, संघर्ष और स्त्री-अस्तित्व की अनकही अनुभूतियों का काव्य-संग्रह है। इन कविताओं में कहीं इश्क़ की कोमलता है तो कहीं टूटकर फिर से खड़े हो जाने का साहस। यह संग्रह केवल भावनाओं का विस्तार नहीं बल्कि समाज, राष्ट्र, अव्यवस्था और भीतर चल रहे मौन संघर्षों की भी अभिव्यक्ति है। हर कविता जीवन के किसी अधूरे सच, किसी प्रतीक्षा, किसी पीड़ा और किसी उम्मीद को स्पर्श करती है। यह पुस्तक पाठकों को ठहरकर अपने भीतर झाँकने, महसूस करने और उन अनकहे एहसासों से जुड़ने का आमंत्रण देती है जिन्हें शब्दों में बाँधना हमेशा आसान नहीं होता।

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About the Author

दीपमाला का जन्म उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िले के छोटे-से गाँव बंगरा में हुआ। रंगमंच से अपने रचनात्मक सफ़र की शुरुआत करते हुए इन्होंने लखनऊ और दिल्ली में सक्रिय रूप से कार्य किया तथा आगे चलकर फ़िल्म उद्योग में सहायक निर्देशक के रूप में लेखन और निर्देशन के व्यावहारिक पक्षों को गहराई से समझा। वर्तमान में ये स्वतंत्र फ़िल्म लेखन, निर्देशन और निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं। विशिष्ट कलात्मक दृष्टि और विश्व सिनेमा की गहरी समझ के लिए पहचानी जाने वाली दीपमाला समकालीन सिनेमा, काव्य और साहित्य जगत में एक उभरती हुई सशक्त रचनात्मक आवाज़ हैं। "धूप में भीगी चाँदनी" इनका पहला कविता-संग्रह है।

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